भारत में आने वाले प्रथम पुर्तगाली वास्कोडिगामा था जिन्होंने 17 मई 1498 इसवी को केप आफ गुड होप से होते हुए भारत के कालीकट बंदरगाह पर आया था उन्होंने भारतीय इतिहास को गहरे रूप में प्रभावित किया । इन्होंने शुरुआत से ही पूर्व में औपनिवेशिक शक्ति स्थापित नहीं कर सका लेकिन विकसित समुद्री शक्ति तकनीक एवं अस्त्र के माध्यम से शीघ्र ही समुद्री शक्ति पर अपना अधिकार कर लिया। भारत में पुर्तगाली व्यापार करने के उद्देश्य से आया था लेकिन इनका एक छिपा हुआ एजेंडा था ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार कर भारतीय को ईसायत में परिवर्तन करना और अपने प्रतिद्वंदी मुख्य रूप से अरब के व्यापारियों को खदेड़ कर बाहर करना एवं अधिक मुनाफे वाले पूर्वी व्यापार पर अपना अधिकार स्थापित करना। उस समय तक हिंद महासागर पर अधिकार अरब व्यापारियों का ही था। कुछ वर्षों में पुर्तगालियों ने अरब के अड्डे को नष्ट किया उनके जहाजों को लूट लिया एवं उन पर प्रहार कर उनके जहाजियो को लूट लिया। पुर्तगालियों की सुदृढ़ स्थिति को देखते हुए पुर्तगाल के सम्राट मैन्युअल प्रथम ने स्वयं को 1501 ईस्वी में भारत फारस और अरब के साथ व्यापार का स्वयं को मालिक घोषित कर दिया। पुर्तगालियों ने भारत में जिस समय आगमन किया था उस समय गुजरात को छोड़कर उत्तरी भारत एवं पूर्वी भारत छोटे-छोटे शक्तियों में विभाजित था ना तो उनके पास नौसैनिक सकती थी और ना ही उन्होंने विकसित करने का प्रयास किया जिसके कारण पुर्तगालियों ने अपना अधिकार कर लिया। दी आज बर्थ लोगों ने 1488 ईस्वी को केप आफ गुड होप की खोज की। ठीक इसके 10 वर्ष बाद वास्को द गामा ने 1498 ईस्वी को भारत आने वाले समुद्री मार्ग का खोज किया। वास्कोडिगामा अक्टूबर 1502 ईस्वी में दूसरी बार भारत के कालीकट बंदरगाह पर पहुंचा उस समय कालीकट का शासक जमोरिन था। उस समय भारत में अरबों का व्यापार काफी बड़े पैमाने पर था पुर्तगालियों को अरबों को प्रतिस्थापित करनेेे के लिए कााफी संघर्ष करनेे की आवश्यकता थी। कालीघाट के हिंंदू शासक जमोरिन पुर्तगालियों से चिंतित नहीं था। 1509 ईस्वी में पुर्तगालियों ने मिस्र केेे शासक ममलुक द्वारा भेजे गए जहाजी बेड़ों को पराजित कर दिल पर अधिकार कर लिया । उन्होंने 1510 ईस्वी में गोवा पर अधिकार कर लिया और उसे अपना प्रशासनिक केंद्रर बनाया। पुर्तगााााल के सम्राट ने 1505 ईसवी में भारत में पहला वायसराय फ्रांसिस्को डी अलमेडा को नियुक्तत किया जिसका कार्यकाल 3 वर्षों का होता था। वायसराय को पुर्तगालियों केे हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुविधाएं एवंं बल किया गया। पुर्तगाल के सम्राट ने भारत के वायसराय को भारत में मुस्लिम व्यापार को नष्ट कर पुर्तगाली व्यापार स्थापित करने का निर्देश दिया गया। भारत का द्वितीय वायसराय या गवर्नर अल्फांसो डी अल्बूकर्क था जो भारत में 1503 ईसवी में स्क्वाड्रन कमांडर के रूप में आया था उसे 1509 ईसवी में भारत का गवर्नर नियुक्त किया गया। इसका भारत में पुर्तगाली साम्राज्य की स्थापना का महत्वपूर्ण भूमिका था। उन्होंने 1510 ईसवी में बीजापुर के गोवा पर अधिकार कर लिया। गोवा की प्राकृतिक बंदरगाह का जहां से पुर्तगाली मालाबार व्यापार पर नियंत्रण करता था एवं राजाओं की नीतियों का निरीक्षण भी इस आधार पर पुर्तगाली गोवा के सामने स्थित मुख्य भूमि दमन राजौरी और दाभोल के बंदरगाहों पर कब्जा करने में सक्षम हुआ। अल्बूकर्क में पुर्तगालियोंं की जनसंख्या में वृद्धि करने के लिए हिंदू महिलाओं केे साथ विवाह की नीति अपनाई ।
उपनिवेशवाद की स्थापना
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| पुर्तगालियों का उपनिवेशवाद |
पुर्तगालियों ने 1510 ईस्वी में गोवा पर अधिकार कर लिया । उन्होंने ने 1515 ईस्वी में मलक्का और कुरमुस पर अपना अधिकार कर लिया। हालांकि 1511 ईस्वी में ही मलक्का पर पुर्तगालियों ने अपना अस्तित्व कायम कर लिया था। उन्होंने सोकोतरा दीप सुमात्रा के सचिन दुर्ग श्रीलंका के कोलंबो इत्यादि जगहों पर अपनेेे नए किले स्थापित किए। जावा थाईलैंड बेगू इत्यादि से भी संपर्क स्थापित किए। पुर्तगालियों ने 1518 में चीन के संचाओ दीप पर अपनी बस्ती बसाने शुरूकर दी । पुर्तगालियों ने पश्चिम भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर अपना अधिकार किया। 1531 ईसवी में चाउल ,1532 ईसवी में दीप ,1534 ईसवी में सालसेट और बेसिन 1536 ईसवी में क्रैगनौर इत्यादि क्षेत्रों पर अपना कब कर उस पर कारखाने खोलें एवं उनका दुर्गीकरण आरंभ किया। कारखानेे का सर्वोच्च अधिकारी पुर्तगाली सम्राट द्वारा नियुक्त होता था।

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