पृथ्वी के नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक प्रश्न आने लगता है कि इतने विशाल पृथ्वी का निर्माण कैसे हुआ होगा । जो देखने में बहुत ही खूबसूरत और प्यारी लगती है आखिर कैसे हुआ होगा यहां पर जीवन की शुरुआत । तो दोस्तों आज के इस आर्टिकल में आपको बताऊंगा कि हमारे पृथ्वी जो देखने में बहुत ही खूबसूरत है इसका निर्माण कैसे हुआ है तो दोस्तों शुरुआत करते हैं बिना समय बर्बाद किए हुए।
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| Solar system |
पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में अनेक धार्मिक एवं वैज्ञानिक तथ्य प्रचलित है जिसमें हम आपको वैज्ञानिक तथ्यों के बारे में बताएंगे। पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में अनेक वैज्ञानिकों ने अपनी अपनी परिकल्पनाऐं प्रस्तुत किए है ऐसे ही एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक इमैनुअल कांट का एक परिकल्पना सामने आया है। इन्हीं तथ्यों का 1796 ईस्वी में प्रसिद्ध गणितज्ञ लाप्लेस ने इसका संशोधन प्रस्तुत किया है जो निहारिका परिकल्पना के नाम से जाना जाता है इस परिकल्पना के अनुसार ग्रहों यानी पृथ्वी का निर्माण धीमी गति से घूमते हुए पदार्थों के बादल से हुआ है जिसका संबंध सूर्य के युवावस्था से है। कुछ समय बाद 1900 ईस्वी में चैंबर्लेन और मॉल्टन ने अपनी परिकल्पना प्रस्तुत किया। इनकी परिकल्पना के अनुसार एक ब्रह्मांड में एक भ्रमणशील तारा सूर्य के नजदीक से गुजरा जिसके गुरुत्वाकर्षण बल के कारण सूर्य के सतह से सिंगार के आकार के कुछ पदार्थ बाहर निकल गए जब यह तारा दूर चला गया तो सूर्य सतह से बाहर निकला हुआ यह पदार्थ सूर्य के चारों ओर घूमने लगा और यह धीरे धीरे संघनित होकर ग्रहों में परिवर्तित हो गया और इस तरह हमारे पृथ्वी का निर्माण हुआ है । तो दोस्तों यह हमारा ग्रहों यानी पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में वैज्ञानिक तथ्य है जो मैं आपको इस वेबसाइट पर एक संक्षिप्त रूप में बताया हूं।

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