यूरोप में 1500 ईसवी से लेकर 1900 ईसवी के मध्य तक का काल कालांतर यूग के नाम से जाना जाता है। इस समय औद्योगिक क्रांति के कारण कृषि में उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा था जिसके कारण व्यापार एवं बाजारों में तीव्र गति से वृद्धि हुई। पूंजीवाद सामंती अर्थव्यवस्था एवं समाज को प्रतिस्थापित कर रहा था । ऐसा होने का मुख्य कारण यह है कि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में व्यापार ,लाभ के उद्देश्य और प्रतियोगिता पर आधारित होती है। व्यापार में विस्तार होने के कारण यूरोपीय व्यापारी नई औपनिवेशिक शक्तियां एवं अन्य विकल्पों की खोज में निकल पड़े।
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| यूरोपीय व्यापारी |
इससे पहले भी यूरोपीय व्यापारियों का भारत के साथ व्यापारिक सबंध था। चीन एवं एशिया के अन्य हिस्सों से संपर्क बहुत प्राचीन था जो मध्यकाल तक जारी रहा मार्को पोलो जिसने चीन की यात्रा की उनकी बृत्तांतो से यूरोपियों बेहद आकर्षित हुआ क्योंकि उनके यात्रा बृत्तांतो में पूर्व की बेशुमार धन संपदा का वर्णन किया गया है जिससे यूरोपीय यात्री काफी लाभान्वित हुए। मार्को पोलो का जन्म 1254 ईस्वी में तथा मृत्यु 1324 ईस्वी में हुई थी। पुनर्जागरण के उद्गम स्थल इटली को कहा जाता है । 15 वी शताब्दी के उत्तरार्ध में शक्तिशाली नरेशो का अभ्युदय हुआ जिन्होंने भौगोलिक खोजों को बढ़ावा दिया और खोजने वाले को वित्तीय मदद भी मुहैया की । 15वीं और 16वीं शताब्दियों में मुद्रण और नक्शा बनाने का काम तेजी से विकसित हुआ कंपास जैसे उपकरणों ने खोजकर्ता को काफी मदद की। भारत में आने वाले प्रथम यूरोपीय व्यापारी पुर्तगाली थ।

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