दोस्तों हम जानते हैं कि भारत में पुर्तगालियों का मुख्य उद्देश्य व्यापार कर मुनाफा प्राप्त करना था तो मैं आज आपको इस आर्टिकल में बताऊंगा कि भारत में पुर्तगालियों ने कैसे अपना व्यापारिक अस्तित्व कायम किया।
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| वन्य नील |
भारत में पुर्तगालियों द्वारा फैक्ट्री की स्थापना।
पुर्तगालियों ने भारत में सीधे तौर पर पूर्वी तटीय क्षेत्रों पर अपना अस्तित्व स्थापित करने का प्रयास किया। कोरोमंडल तट पर स्थित पुलीकट, मसूलीपट्टम इत्यादि क्षेत्रों से वे वस्तुओं को इकट्ठा करते थे। बंगाल के शासक महमूद शाह ने पुर्तगालियों को 1536 ईसवी में सतगांव एवं चटगांव में फैक्ट्री खोलने की अनुमति दी। अकबर की अनुमति से हुगली में तथा शाहजहां की अनुमति से बुंदेल में भी पुर्तगालियों को फैक्ट्री खोलने की अनुमति दी गई। 16 वीं शताब्दी तक पूर्वी भागो में किलेबंदी नहीं हुई थी। 16 वीं शताब्दी के आरंभ में पुर्तगालियों का एशिया के व्यापार पर अधिकार बना रहा। 1506 ईसवी में मसाले के लाभदायक व्यापार को राजाओं ने अपने अधीन कर लिया । दूसरी तरफ पुर्तगालियों ने अपने अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए भरपूर बल लगा दिया । भारतीय से कई प्रकार से पैसा वसूला जाता था उनमें से एक था कार्टेज व्यवस्था। यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें भारतीय जहाज के कैप्टन को गोवा के गवर्नर से एक पास या लाइसेंस लेना पड़ता था जिससे पुर्तगाली भारतीय जहाजों पर हमला नहीं करता था अन्यथा वे इसे लूट लेते थे। पुर्तगालियों का समुद्र पर वर्चस्व रहने का मुख्य कारण यह था कि मुगल शासकों ने कभी भी अपनी नव सैनिक शक्ति विकसित करने का प्रयास नहीं किया।
पुर्तगालियों के द्वारा वस्तुओं का आदान प्रदान।
पुर्तगालियों के पास ऐसी कोई भी वस्तु नहीं थी जिससे वस्तु विनिमय द्वारा व्यापार कर सके इसलिए वे पूर्व की वस्तुओं के लिए पश्चिम से सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्न आया करते थे। मालाबार और कोंकण तट से सबसे ज्यादा काली मिर्च का निर्यात होता था। मालाबार से अदरक ,दालचीनी ,चंदन, हल्दी, नील इत्यादि निर्यात किए जाते थे। उत्तर पश्चिम भारत से चिंटस इत्यादि पुर्तगाली ले जाते थे। जटामांसी बंगाल से लाया जाता था। दक्षिण पूर्वी एशिया से लाख लॉन्ग, कस्तूरी इत्यादि इकट्ठा किए जाते थे। भारत से पुर्तगालियों का व्यापार इतना बढ़ गया था कि मात्र काली मिर्च की खरीद के लिए संयुक्त व्यापार संघ ने 170000 क्रूजेडो भारत भेजने का निर्णय लिया। पुर्तगाली फ्लैंडर्स जर्मनी इंग्लैंड इत्यादि क्षेत्रों से गुलाब जल मूंगा तांबा पारा सिंदूर आदि वस्तुएं भारत मे लाते थे। ढालें हुए सिक्के भी कोचीन और गोवा बंदरगाह पर लाए जाते थे।
इस प्रकार पुर्तगालियों ने मसाले के व्यापार के साथ साथ विभिन्न एशियाई देशों के बीच समान का आयात और निर्यात करने से भी मुनाफा प्राप्त किया। और इस प्रकार पुर्तगालियों ने भारत में व्यापारिक अस्तित्व कायम किया। तो दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी होगी। धन्यवाद।

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