हेलो फ्रेंड्स आज हम आप लोगों को बताएंगे कि आकाश में तारे का निर्माण कैसे हुआ है अक्सर हमारे दिमाग में ऐसे प्रश्न आते रहते हैं कि इतनी खूबसूरत आकाशगंगा है जिनमें तारों का निर्माण कैसे हुआ है देखने में काफी मनमोहक लगता है। आगे हम आपको यह भी बताएंगे कि चंद्रमा जो कि पृथ्वी का एक मात्र उपग्रह है का निर्माण कैसे हुआ है । जहां पर प्रथम अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग ने अपना पहला कदम रखा था जोकि पृथ्वी पर के लिए बहुत बड़ा उपलब्धि था। इन सभी बातों का जिक्र हम आगे करने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं बिना समय बर्बाद किए हुए।
तारों का निर्माण कैसे हुआ है।
प्रारंभिक समय में ब्राह्मण में ऊर्जा और पदार्थ का वितरण एक समान नहीं था। घनत्व में भिनता के कारण गुरुत्वाकर्षण बालों में विभिन्नता आई। जिसके कारण से पदार्थों का एक स्थान पर एकत्रित होना शुरू हुआ । यही एकत्रण आकाशगंगाओ के विकास का आधार बना। एक आकाशगंगा में अनेकों तारे होते हैं। आकाशगंगा का विस्तार इतना अधिक होता है कि उनकी दूरी हजारों प्रकाश वर्ष में मापी जाती है। एक अकेली आकाशगंगा का ब्यास 80000 से 150000 तक हो सकती है। अकाश गंगा के निर्माण की शुरुआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है जिसे निहारिका कहा गया। इस बढ़ते हुए निहारिका में गैस के झुंड विकसित हुए । यह झुंड बढ़ते बढ़ते घनी गैसीय पिंड बने जिससे तारों का निर्माण आरंभ हुआ। वैज्ञानिकों का ऐसा विश्वास है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्षों पहले हुआ था। तो दोस्तों यह था हमारा तारों के निर्माण से संबंधित वैज्ञानिक कारण। अब हम आपको बताएंगे कि पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ है।
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चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ है?
चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है पृथ्वी की तरह चंद्रमा की उत्पत्ति के संबंध में अनेक मत प्रस्तुत किए गए हैं। सन 1838 ईस्वी में सर चार्ज डार्विन ने सुझाया की प्रारंभ में पृथ्वी व चंद्रमा तेजी से घूमते हुए एक ही पिंड थे। यह पूरा पिंड डंबल की आकृति में परिवर्तित हुआ और कुछ समय बाद टूट कर अलग हो गया। उनके अनुसार चंद्रमा का निर्माण उसी अलग हुए पदार्थ से हुआ है जहां आज प्रशांत महासागर एक गर्त के रूप में मौजूद है।
लेकिन वर्तमान समय के वैज्ञानिक इनमें से किसी भी व्याख्या को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है वे कहते हैं कि पृथ्वी के उपग्रह के रूप में चंद्रमा की उत्पत्ति एक बड़े टकराव का नतीजा है जिसे द बिग स्प्लेट कहा गया है। ऐसा मानना है कि पृथ्वी के बनने के कुछ समय बाद ही मंगल ग्रह के 1 से 3 गुना बड़े आकार का पिंड पृथ्वी से टकराया। टकराव से पृथ्वी का एक हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में बिखर गया। टकराव से अलग हुआ यह पदार्थ फिर पृथ्वी के कक्ष में घूमने लगा और आज का चंद्रमा बना। यह घटना यानी चंद्रमा की उत्पत्ति आज से लगभग 4.44 अरब वर्षों पहले हुई। तो दोस्तों यह था चंद्रमा की उत्पत्ति के संदर्भ में वैज्ञानिक तथ्य । अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो हमारे ब्लॉग को फोलों और सब्सक्राइब करें। धन्यवाद।

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