पुर्तगालियों द्वारा हुगली पर अधिकार ।
24 जून 1632 ईसवी को पुर्तगालियों ने हुगली पर अधिकार कर लिया जो 3 महीने बाद समाप्त हो गया। हुगली गंगा के किनारे खुले मैदान में स्थित है जो ज्यादा महत्व का नहीं था। पुर्तगाली बारूद एवं नौवहन में काफी विकसित है जिसके कारण मुगल साम्राज्य को उनसे कुछ भयभीत भी हुआ । मुगल साम्राज्य के शासक ने कासिम खान को 150000 की सेना के साथ पुर्तगाली बस्ती पर हमला करने को कहा । 3 महीने 24 सितंबर तक 300 पुर्तगाली और 600 निवासी ईसाई सैनिक सामना करते रहे कुछ ही समय पश्चात वे भाग गए। अधिकांश जहाज समुद्र मे खो गए और कुछ जहाजों से पुर्तगाली सागर दीव तक पहुंचने में सक्षम हुए जहां अधिकांश पुर्तगाली भूख का शिकार हो गए । मुगलो के भी 1000 लोग मारे गए थे लेकिन उन्होंने 400 पुर्तगालियों को बंदी बना लिया और उन्हें आगरा लाया गया । उन पुर्तगालियों को मुगलों ने इस्लाम धर्म अपनाने या दासता स्वीकार करने का विकल्प दिया। ईसाइयों का अत्याचार कुछ समय तक जारी रहा लेकिन फिर धीरे धीरे समाप्त हो गया।
पुर्तगालियों के पतन होने का मुख्य कारण।
(1) 1580 ईसवी में पुर्तगाल स्पेन के राजा के साथ जुड़ गया और स्पेन के पतन होने के साथ साथ इनका भी पतन हो गया ।
(2) 1588 ईसवी के नौसेना युद्ध में अंग्रेजों ने स्पेन को करारी जवाब दी ।
(3) पुर्तगाल के अंदरूनी मामलों ने उसकी शक्ति कमजोर की।
(4) समाज में कुलीन वर्ग का प्रभुत्व था और व्यापारियों का इतना सामाजिक प्रभाव नहीं था की वे राज को अपने हितों की पूर्ति के लिए प्रभावित कर सके ।
(5) पुर्तगाल में सम्राट निरंकुश था।
(6) धर्म के मामले में पुर्तगाली असहिष्णु एवं धर्मांध थे और कई स्थानों पर उन्होंने लोगों का जबरन धर्म परिवर्तन किया।
(7) फितोरिया मात्र एक व्यापारिक अड्डा था जिसे क्षेत्रीय राज्य के रूप में बदलने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई।
(8) पुर्तगालियों ने स्वयं को एकाधिकार व्यापार के मुनाफो तक ही सीमित रखा।
(9) उनका नियंत्रण कुछ क्षेत्रों जैसे उत्तरी अफ्रीका ,दीव ,दमन, गोवा ,तिमोर और मकाओ तक ही सीमित रह गया ।
(10) भारतीय शासकों एवं जनता के प्रति धार्मिक असहिष्णुता।
(11) उन्होंने डकैती और लूटमार को अपनी नीति का भाग बनाया।
(12) उन्हें डचो और अन्य यूरोपीय व्यापारिक शक्तियों से संघर्ष करना पड़ा।
(13) वास्तव में पुर्तगाली आर्थिक और राजनैतिक रूप से दूसरी पश्चिमी शक्तियों से प्रतिस्पर्धा करने में अक्षम थे।
(14) ब्राजील की खोज के बाद उनका भारत की ओर ध्यान कम हो गया।
(15) पुर्तगाल में उनके उद्योग धंधे अधिक विकसित नहीं हो पाए और वह वितरक के रूप में व्यापार करते रहे।
(16) पुर्तगाली व्यापारियों पर पुर्तगाली राजा का अत्यधिक नियंत्रण था।
दोस्तों यह था हमारा पुर्तगालियों के हुगली पर अधिकार एवं उनके पतन का मुख्य कारण । अगर हमसे किसी प्रकार की कोई त्रुटि रह गई हो तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं । भारत में शासन करने वाले अगले यूरोपीय डच थे जिनका विवरण आगे क्या आर्टिकल्स में है। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो हमारे ब्लॉग को फॉलो और सब्सक्राइब जरूर करें।
डच...
धन्यवाद

0 Comments
If you have any enquiry regarding this site then contact me.