दोस्तों आपको मैंने  पिछले आर्टिकल में यह बताया हूं कि पृथ्वी एवं ग्रहों की उत्पत्ति किस प्रकार हुई है ? आज हम आप लोगों को बिग बैंग सिद्धांत के बारे में बताएंगे जिन्हें अधिकांश वैज्ञानिक ब्रह्मांड की उत्पत्ति के लिए जिम्मेवार मानते हैं आधुनिक समय में इन्हीं सिद्धांतों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति के लिए जिम्मेवार माना जाता है तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं । 


वर्तमान समय में ब्राह्मण की उत्पत्ति के लिए यह एक सर्वमान्य सिद्धांत है । इसे विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना के नाम से भी जाना जाता है। एक भूगोलवेत्ता एडविन हबल ने 1920 ईस्वी में यह बताया था कि समय बीतने के साथ-साथ ब्रह्मांड में विस्तार हो रहा है । आकाशगंगाऐ एक दूसरे से दूर जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एक प्रयोग भी प्रस्तुत किए हैं। बिग बैंग सिद्धांत के द्वारा ब्रम्हांड का निर्माण 3 चरणों में संपादित हुआ। 

(1) प्रारंभ में वे सारी पदार्थ जिनसे ब्रम्हांड का निर्माण हुआ है वे अतिसूक्ष्म गोलक के रूप में थे जिनमें आयतन बहुत कम एवं तापमान एवं दाब अनंत था।

(2) बिग बैंग की प्रक्रिया के दौरान इस अतिसूक्ष्म गोलक में भीषण विस्फोट हुआ। इस प्रकार की विस्फोट प्रक्रिया में बृहद विस्तार हुआ । वैज्ञानिकों का मानना है कि बिग बैंग की घटना आज से लगभग 13.7 अरब वर्षों पहले हुई थी । ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्फोट के कारण कुछ ऊर्जा पदार्थ में परिवर्तित हो गया। विस्फोट के 1 सेकंड के अंतर्गत ही बृहद विस्तार हुआ इसके बाद विस्तार की गति अत्यंत धीमी हो गई। बिग बैंग घटना के शुरुआत के 3 सेकेंड के अंदर ही प्रथम परमाणु का निर्माण हुआ।

(3) बिग बैंग के 300000 वर्षों के दौरान तापमान 4500 डिग्री केल्विन तक गिर गया और परमाण्विक पदार्थ का निर्माण हुआ। ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया । ब्रह्मांड के विस्तार का अर्थ है आकाशगंगा के बीच की दूरी में वृद्धि होना । तो दोस्तों यह था  बिग बैंग से संबंधित सिद्धांत जो मैंने आपके साथ शेयर किया हूं।